singham
Tuesday, September 13, 2011
Sunday, September 11, 2011
दुष्ट की साहयता
एक बार एक बाघ के गले में हड्डी अटक गयी. बाघ ने उसे निकालने की बड़ी चेष्टा की, पर उसे सफलता नहीं मिली. पीड़ा से परेशान हो कर वह इधर उधर दौड़ भाग करने लगा. किसी भी जानवर को सामने देखते ही वह कहता - भाई! यदि तुम मेरे गले से हड्डी को बाहर निकाल दो तो मै तुम्हें पुरस्कार दूंगा और आजीवन तुम्हारा ऋणी रहूँगा. परन्तु कोई भी जीव भय के कारण उस की सहायता करने को राजी नही हुआ.
पुरस्कार के लोभ में आख़िरकार एक बगला तैयार हुआ. उसने बाघ के मुंह में अपनी लम्बी चौंच डाल कर अथक प्रयास के बाद बाघ के गले की हड्डी को बाहर निकाल दिया. बाघ को बड़ी राहत मिली. बगले ने जब बाघ से अपना पुरस्कार माँगा तो बाघ आग बबूला होकर दांत पीसते हुए बोला- अरे मूर्ख! तूने बाघ के मुंह में अपनी चौंच डाल दी थी, उसे तू सुरक्षितरूप से बाहर निकाल सका, इसको अपना भाग्य न मान कर ऊपर से पुरस्कार मांग रहा है? यदि तुझे अपनी जान प्यारी है तो मेरे सामने से दूर हो जा, नहीं तो अभी तेरी गर्दन मरोड़ दूंगा. यह सुनकर बगला स्तब्ध रह गया और तत्काल वहां से चल दिया. इसी लिए कहते हैं कि- दुष्टों की साहयता करना भी अच्छा नहीं. ये भारत वर्ष हमारा है |
हम को प्राणों से प्यरा है|
ये भारत वर्ष हमारा है|
हम को प्राणों से प्यारा है|
है हवा मनोहर डोल रही |
बन में है कोयल बोल रही|
बहती सुगंध की धारा है |
ये भारत वर्ष हमारा है |
ये भारत वर्ष हमारा है|
हम को प्राणों से प्यरा है|
ये भारत वर्ष हमारा है|
हम को प्राणों से प्यरा है|
ये भारत वर्ष हमारा है|
हम को प्राणों से प्यारा है|
है यहाँ हिमालय खड़ा हुआ |
सन्तरी सरीखा अड़ा हुआ|
गंगा की निर्मल धरा है|
ये भारत वर्ष हमारा है,
है यहाँ हिमालय खड़ा हुआ |
सन्तरी सरीखा अड़ा हुआ|
गंगा की निर्मल धरा है|
ये भारत वर्ष हमारा है,
ये भारत वर्ष हमारा है|
हम को प्राणों से प्यरा है|
हम को प्राणों से प्यरा है|
ये भारत वर्ष हमारा है|
हम को प्राणों से प्यरा है|
हम को प्राणों से प्यरा है|
हर्षित सिंह garewal
SANSAR
Sabse pahale meria ghar ka
Ande jaise tha aakar
Tabh mein yahei samazhti thi
Bas itena sa he hai sansar
Fir maren ghar bana ghosla
Sukhe tinko se tayyar
Tabh mein yahei samazhti thi
Bas itena sa he hai sansar
Akhir mein jab aasman me
Udhi dur tak phank pasar
Tabhi samaz mein meari aaya
Bahut bada hai yeh sansar
BADAL
Kon sindhu se jal bhar lata
Umad-umad jag mein barashta
Garmi mein din thap-khap hote
Agar na nabh mein badal hote
Kabhi na bijli chamak dhikate
Dunia mein kya damak dhikate
Kabhi na bahate jharne sote
Agar na nabh mein badal hote
Moar na khus ho shor macahte
Meindhak kabhi na tar- tarate
Pyise marte chidya- tote
Agar na nabh mein badal hote
Kabhi na hoatein nadiya-naharien
Kabhi na hoatein sunder laharien
Kahen nahate khate gote
Agar na nabh mein badal hote
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